Poem selfishness

मोह के रंग न बांध किसी को
बांध तो रंग सच्चे मन के हो।
जीवन से न जोड़ किसी को
जोड़ तो जोड़ न तोड़ किसीको
लम्बी लंबी राहे दे दी मुख को
देख न मोड़ न मोड़ किसी को
दर्पण हर किसी को दे दे कि
खुद के दर्प को देख सके तो
या यह मन गर्वित हो जाये
खुद कि करनी पर मुस्काये
या ऐसा कर कि मैल दिखे तो
खुद से चेहरे को साफ तो करे वो।
By sujata mishra
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