Article ma ke hathon ki khushbu

आजकल का नया ट्रेंड है, खाना बनाते वख्त कोशिश करते है कि अनाज और सब्जियों को छूना न पड़े।
कभी भी किसी को खाना बनाते वख्त ध्यान से देखे। खाना बनाते समय स्त्रियों या लड़कियों के खाना बनाने के ढंग को देखकर भी उनके द्वारा बनाये जा खाने की स्वादिष्टता को परखा जा सकता है।
जो स्त्री खाना बनाते समय साफ सफाई के साथ तल्लीनता से खाना बनाती है वे श्रेष्ठतम व्यंजन बनाती है।
कभी किसी को आलू का चोखा बनाना हो तो श्रेष्ठ स्तरीय स्त्रियाँ हाथों से उस चोखे को मैश करेंगी, और हाथ धुलकर।

जबकि औसतन स्त्रियाँ आलू का चोखा बनाने के लिए बिना हाथ धुले चम्मच से मिलायेंगी।

श्रेष्ठ कार्य करने वाली स्त्रियाँ जब खाना बनाने में अपने हाथों से कुछ भी कार्य करती है तो उनके हाथों की खुशबू भी उस कार्य में सम्मलित हो जाता है।
वही निम्न श्रेणी में उनके काम न करने या खाना न बनाने की इच्छा उनके खाने के स्वाद को बिगाड़ देती है।

यही कला है जो भारतीय व्यंजन को सर्वश्रेष्ठ करती है।
तभी तो कहा भी जाता है, माँ के हाथों की खुशबू है आज खाने में।
By sujata mishra
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