Poem on morality
आसमा आसमा आजमा ले मुझे
इस कदर झूमती ले गिरा दे मुझे
पल ठहर सा रहा न भूला न भुला
कोई है जो है उस आसमा पे बैठा
कोई है जो हमें है रोकता टोकता
कोई है जो हमें है सोचता बोलता
कठपुतलियों सा डोरी में ले घूमता
है सहेजता हमे है हमे बिखेरता
रश्मिरथी है ईश्वर जो हमे देखता
किरणों से भरता स्वर्निम करता
अपने स्वप्नों को साकार करता
कभी निराकार कभी आकार भरता
वो तो ईश्वर है आसमा पर जिसका
जिसका हर जहान पर एक घर है।
हम कठपुतलियां लड़ते है कटते है
ईश्वर के घर को अपना हम कहते है।
By sujata mishra
#poem #fight #land #property #hindi #motivational #moral #new
इस कदर झूमती ले गिरा दे मुझे
पल ठहर सा रहा न भूला न भुला
कोई है जो है उस आसमा पे बैठा
कोई है जो हमें है रोकता टोकता
कोई है जो हमें है सोचता बोलता
कठपुतलियों सा डोरी में ले घूमता
है सहेजता हमे है हमे बिखेरता
रश्मिरथी है ईश्वर जो हमे देखता
किरणों से भरता स्वर्निम करता
अपने स्वप्नों को साकार करता
कभी निराकार कभी आकार भरता
वो तो ईश्वर है आसमा पर जिसका
जिसका हर जहान पर एक घर है।
हम कठपुतलियां लड़ते है कटते है
ईश्वर के घर को अपना हम कहते है।
By sujata mishra
#poem #fight #land #property #hindi #motivational #moral #new
Comments
Post a Comment
Thanks for your feed back we get you back