Poem on grandmther / mom / dadi ma

कुछ लोग तैयारी कर रहे थे।
कुछ थके हुए थे।
कुछ सबको देख रहे थे।
कुछ बातों में व्यस्त थे।
कुछ घूम रहे थे।
कुछ खेल रहे थे।
कुछ खोये हुए थे।
कुछ सलाह मांग रहे थे।
कुछ सलाह दे रहे थे।
कुछ ईश्वर के भरोसे थे।

तब जब सब अपने 2 काम में व्यस्त थे, उस समय भी कुछ मां और दादी माँ अपना सब कुछ छोड़ कर बच्चों और पोतों बारे में सोचती और उनकी मंगल कामना करती है।
हिंदू परिवेश की सम्पन्नता और समृद्धि का आधार ही प्यार है।
जहां प्यार होगा वहां से गई खुशी का मन भी कहीं न लगेगा उसे तो वापस लौटना होगा।
By sujata mishra
#love #mother #gradmother #kids #childrens #son #base #progress #wealth

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