Environment poem latest

संग समर्पण सम्मान स्नेह शुभाशीष
देख रास्ता खोलती मधुर व्यवहार से
हर लोक में श्रेष्ठ है वह वही जो सिर्फ
लड़ता हर युद्ध मृत्यु जीवन मृदुवार से
कलरव करती यूँही रोज पक्षी दिनरात
सूर्यतप्त है जो खड़ा हरपल बना प्रमाण
नदियां झरने सूखते न कर सके प्रतिकार
उस मनुष्य का जिसने छीन ली मुस्कान
खुद के लिए प्रकृति का किया सर्वनाश
देख रंग बिखेरता लेकर तुम्ही से ये कौन
सुन ध्वनि को है ये बजाता लेके तुम्ही से
बोलता है मृदु भाष किसका? तुमसे ही
सजग नही हम संग नही हम न समर्पण
स्नेह सम्मान शुभाशीष न कुछ मोल इनका
पृथ्वी काँपती उठा सिर बोलेगी इक दिन
बदलेगी ऊर्जा को ऊर्जा से तेरी और मेरी।
By sujata mishra
#save #energy #earth #environment #water #animals #plants #trees #love #freedom #birds #listen #hear #smile

Comments

Popular posts from this blog

How to register to vote in india

Vivid Techno: hindi poem - इतनी दूर चले आये

army poem latest indian