Poem mann

मन जो कहे वही करना
जो कुछ भूले तो भूलना
दिल भी दुख जाए तो भी
न कभी पछताना तू तो
परिंदा नही है तू तो
बंधन भी नही है तू तो
जीता भी नही है तू तो
मरता भी नही है खुद से
जंजीरों सा जकड़ा मेरा
दिलों दिमाग़ जा फिकता
भी नही है मेरा कुछ भी
नही है मेरे बस में तू तो
संभल जा रुक जा तू तो
रुक रुक जा रुक जा तू तो
ईश्वर है हर कण में ही तू तो
बस जा बस जा मन में तू तो
नैनन में रुक जा रुक जा तू तो
छवि अपनी दे जा दे जा तू तो
सखि है समझी है मुझे तू तो
सखि तू बन जा सखि तू ही
तू सखि तू ही तो है सखि री।
By sujata mishra
#ishwar #sakhi #mann

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