poem on moh / money

ये जो मोह लगा बैठा तू मुझसे
ये जो मोह लगा बैठा तू मुझसे
भूल रहा कुछ बंधन तन मन के
जकड़ जंजीरों में रखले तू उन
उड़ जाएगा ये तोड़ तेरे पखिरे
ये जो मोह लगा बैठा तू मुझसे
ये जो मोह लगा बैठा तू मुझसे
जल जल चहुँ दिश जो बहेगी
निर्मल शांत स्वभाव कहेगी उन
पत्थर को जो रोक न लेंगी मन
मन उड़ चला कोई और कोई देश
ये जो मोह लगा बैठा तू मुझसे
ये जो मोह लगा बैठा तू मुझसे
कहे जीवन जो मैं छोड़ ही दूँगा
पथ पर बढ़ तो भी मोड़ मैं दूँगा
न चल तो भी जोड़ ही दूँगा मैं
वह है मेरा अंश अनमोल।
ये जो मोह लगा बैठा तू मुझसे
ये जो मोह लगा बैठा तू मुझसे
क्यूँ भूल रहा जीवनमृत्यु ज्योत।
By sujata mishra
#Poem #life #death #love #money #root #rout #mercy #me #you

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