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sushant singh rajuput - ssr

बहुत सारी चीजे बहुत तेजी से बदल रही है। पर भाईओं और बहनों कभी भी इतने ज्यादा सीधे न बनो कि खुद को भी न बचा पाओ। सुशांत सिंह जैसे भाईओं / बहनों आजकल की दुनिया आपके लिए नहीं है यहाँ आपके मेहनत के पैसे से अय्याशी कोई और कर लेगा। जो कमाता है उसे पता होता है मेहनत अय्याशी पर उड़ाने की वह कभी सोचेंगे ही नहीं। इतने सीधे सरल न बनो , खुद टूटोगे पेड़ से अलग होकर कौन जी सका है ? राष्ट्र को अच्छे लोगों की जरुरत है खुद को न बचा सकोगे तो परिवार, मुहल्ला, राज्य, और सबसे ज्यादा देश कैसे बचेगा? आजकल धूर्त लोग सीधे लोगों को टारगेट करते है। आजकल प्यार एक दिन में क्या एक सेकंड में हो जाता है। सोशल मीडिया पर किसी से बात कीजिये तो तुरंत प्यार का इजहार कर दते है लोग। ये तो कुछ भी नहीं हमें लगता है रोड पर रेड लाइट होने पर आँख किसी से मिलते ही इन जैसे धूर्त लोगों को प्यार हो जाता होगा। जैसे को तैसा हम हमेशा से मानते आये है। एक बात और महाराष्ट्र सरकार और पुलिस कितना भी कुछ भी कर के ....... को बचा भी ले कुदरत खुद इंसाफ कर देती है। महाराष्ट्र सरकार और पुलिस से तो शायद कम सजा मिले कुदरत जब सजा देती है तो उसका इंसाफ ...

कठपुतलियों कि डोर

ये कहानियां सिखाती है जरा सोचो और समझो बोलती इन कठपुतलियों कि डोर टूट जाएगी अपनी जिद अपनी जिद से न खींचों न खींचों ख़ामोश है ये सदा  आवाज तो तुम ही हो इनकी इनकी अठखेलियों से  तुम भी तुम ही  हसती हसाती जीवन को चलाती कुछ तो समझो बेबसी इनकी जिनको  तुम हो नाचती। क्या बोलती क्या जोड़ती खुद ही तोड़ती टूटती तो भी मुस्काती  क्यूंकि मैं इक कठपुतली डोर से बंधी  डोर से जुड़ी जुड़ी हुई ईश्वर के डोर से। Written  By Sujata Mishra  #Latest #poem #new #thread #stream #chess #dance #fault #life #god #happiness #sadness #human #I

Defeat negative

Defeat negative Spreading poverty spreading nigligence Few people are doing good but most of bad Balancing mine power controling desires  Cutting my wings by own if it's going to wrong See you in troubles my heart is breaking down Mine country is blooming when resins 

और कोरोना कहलाऊंगा।

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एक छोटा कण।  सबके साथ धूमिल हो रहा। पानी के साथ बहता तो धूप से सूखकर हवाओं में उड़ता।  कभी इधर कभी उधर। एक छोटा कण। अस्तित्व विहीन कहलाता। कभी चट्टानों से लड़ जाता वह रूठकर पैदल चलता । कभी इधर कभी उधर। एक छोटा कण। तू निर्जीव तू है तत्व हीन। आखों से जो दिखता तक नहीं वह मुस्काता पल पल मर। कभी इधर कभी उधर। एक छोटा कण। खुदको जो मै विषाक्त करु। इन लोगों को मैं राख करु तो वह दिन भी आएगा जब दुनियां रोएगी। मैं गाऊंगा। विषाणु बन त्रस जाऊंगा। एक छोटा कण। और कोरोना कहलाऊंगा। Poem by sujatamishra बस यही कहना चाहूंगी कुछ भी यूंही नहीं होता हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे कुछ और ही सच होते है, वैसे ही हर मुश्किलों के पीछे की अलग ही सच्चाई होती है। हर चीज सजीव है अगर खुशियां दे जाए, हर चीज निर्जीव है अगर दिल दुखाये। By Sujata Mishra  #corona #covid19

आक्षेप

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किसी पर भी सुनी सुनाई बातों से आक्षेप कर देना आसान है, किसके साथ क्या हुआ, बिना किसी साक्ष्य के समझ पाना आसान नहीं है।  जब एक व्यक्ति सफलता की सीढ़ियों पर चढ कर, आगे बढ़ चुका हो, सुखी समृद्ध परिवार, के बाद आत्महत्या करना बिल्कुल ही अमान्य है।  आज सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की खबर, एक सफल कम उम्र युवक कलाकार की मौत इन हालातों में 14 जून 2020 को, जबकि उनकी पिछली मैनेजर दिशा स्लियान की मृत्यु भी आत्महत्या ही मानी जा रही है, अभी तक की जानकारी को माने तो दिशा ने 12 वीं मंजिल से कूद  कर आत्महत्या कर ली थी। इतने कम समय अंतराल में दोनों सेलिब्रिटी की आत्महत्या की खबर कुछ नहीं बहुत ही अटपटी सी लगती है। और उस समय जब सुशांत सिंह राजपूत की सफलता कदम चूम रही हो। अकेले बांद्रा हाउस में रह रहे सुशांत सिंह राजपूत के साथ क्या अनहोनी हुई, इसके साक्ष्य वे स्वयं थे।  कई लोगो ने आक्षेप लगाया कि सुशांत सिंह राजपूत कायर थे, इस तरह उन्हें नहीं करना चाहिए। कुछ भी सोचने, बोलने, लिखने से पहले लोगों असलियत जानने की कोशिश करे। जहां व्यक्ति अकेला खुद साक्ष्य है, वहां उसके साथ क्या हुआ, उस सम...

लालच और कर्म फल

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एक राजा था।  उनके जो भी पुत्र हुए उसके नेत्र नही थे। अब परेशानी ये आ गई कि राजा के बाद वारिस कैसे आगे राज्य चलाएंगे। लगातार चार पुत्रों की इस समस्या से परेशान राजा को कुछ समझ नही आ रहा था। जन्मजात अंधे पुत्रों का वैद्यों ने ठीक होना भी मना कर दिया कि जन्मजात अन्धे है इनका इलाज नही होगा। राजा थक हार चुका था। उसने सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दिया। समय बीत रहा था । मंत्री का बेटा भी बड़ा हो रहा था उन राजकुमारों के साथ ही रहता था। एक दिन एक सन्यासी राजा के बाग से गुजर रहा था। उसने चारों राजकुमारों को गाते सुना। उनकी मीठी बोली सुन प्रसन्न हो सुनता ही रहा। उसने उनसे पूछा कि ये कहाँ से सीख तो उन्होंने कहा हम देख नही सकते, पर हमने अपने बोलने की शक्ति को जागृत किया। और हम चारों इस विद्या में एक दूसरे के गुरु है। मंत्री के बेटे से उसने पूछा कि आप किस विद्या में निपुण हो?  तो उस घमंडी बालक ने कहा - मैं क्या करूँगा ये सब करके। इनके पास आंखे नही है इसलिए ये गा कर समय व्यतीत करते है। मेरे पास तो आंखे है, मैं क्यों यह करू। और अब तो राज काज भी मैं ही देखूंगा। इतना सुनते ही सन्यासी ने अपनी आंखें बंद की...

YOGA VS GYM

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Yoga vs Gym 1* Its none of the question that we ask yoga is better or gym? obviously Yoga, tremendously have larger dimensions. Yoga provides peace to mind, gives perfect shapes to body physically, and last the most important satisfies the inner soul which is an amazing factor of Yoga ! While Gym only improving your physical body.   2*  Yoga gives a high spiritual aura, protect you from negative environment and evils. to be continued  Sujata Mishra  9868663467